दिव्यांग पति ने अपने जीजा से सुहागरात में चुदवाया जानिए मेरी कहानी

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First Night Sex Story, Jija ji Chudai, Suhagrat Sex, Desi Sex, Sex Story : मेरा नाम राखी है मैं उन्नीस साल की हूँ। दोस्तों आप सुन्दर हो तो अच्छे बॉयफ्रेंड मिल सकता है। लोग आपको झांसे में लेने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। आप को चोदने की इच्छा रखेंगे। पर शादी की बात जैसे होगी आपको अपनी औकात के अनुसार ही मिलेगा अगर मैं गरीब हूँ तो गरीब के घर ही जाउंगी। और अगर परिवार सही नहीं रहा और बिखरा हुआ रहा तो आपकी ज़िंदगी भी बिखरी हुई रहेगी। आज मैं अपनी कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर सुनाने जा रही हूँ। कैसे मेरे घर वाले ने एक दिव्यांग के साथ मेरी शादी कर दी।

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मेरे पापा पहले ही गुजर गए थे। घर में मैं और मेरी दो छोटी बहन। हमेशा रोटियों के लाले पड़े रहते थे क्यों की माँ एक छोटा सा दूकान चला कर किसी तरह हम लोगों को बड़ा किया। अब बड़ा होने के बाद शादी के बारे सोचने लगी। फिर शादी के लिए खर्चे नहीं हमलोगों का कोई स्टेटस नहीं कोई मदद करने वाला नहीं। दुखी हो गई थी ज़िंदगी से बस दिन रात यही चर्चा की मेरी शादी मेरी शादी कब होगी।

किसी जानकार ने एक लड़के के बारे में मेरी मम्मी से बताई की घर बहुत अच्छा है। किसी चीज की कमी नहीं है बहुत पैसे वाला है। गाड़ियां है अपना व्यापार है इज्जतदार लोग है। पर लड़का दिव्यांग है पोलिओ का शिकार है। मम्मी को सब कुछ पसंद आ गया। वो सोची की कभी मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी। पर मेरी बहन और मेरे कुछ दोस्त बोलने लगे की लड़का ही सब कुछ होता है। धन दौलत का क्या करोगी। पर मेरे लिए कोई रास्ता नहीं था। मुझे भी लगा की मेरे से दो मेरी छोटी बहन है अगर मैं मजबूत रहूंगी तो इन लोगों को भी मदद कर सकुंगी और माँ जो अकेली हो जाएगी उसका भी सहारा बन पाऊँगी। और सिर्फ लड़का देख कर शादी कर ली तो खुद ही वो डींगे मारने में लगा रहेगा होगा कुछ भी नहीं बड़ा बनने की बात करता रहेगा। मुझे ऐसा लड़का भी नहीं चाहिए जो गरीब हो या स्ट्रगल कर रहा हो।

मैं अपने मम्मी को हां कर दी शादी के लिए। और फिर मेरी शादी 2 जनवरी को 2020 को हो गई। दोस्तों शादी बहोत धूमधाम से हुआ वो सब मिला जो मैंने सपने में भी नहीं सोची। बीस तोले सोने महंगी साड़ियां। वो सब जो मेरे पहुच से हमेशा ही दूर थे वो सब चीज। मैं बहुत ही खुश थी मेरी माँ भी और मेरी बहनें भी। मेरे ससुराल वाले ने मेरी माँ को भी अच्छे खासे पैसे दिए शादी के लिए क्यों की उनलोगों को पता था इनके पास कमी है। वो अपनी शादी अच्छे से करना चाहते थे इसलिए कोई कमी नहीं रहे दोनों साइड से इसलिए दिल खोल कर खर्चे किया।

मेरी डोली ससुराल आ गई। पूरा घर भरा हुआ था मेहमानो से मुझेः ढेर सारी अंगूठियां पैसे जेवर मिले मुँह दिखाई में। शाम हो गई मेरी दोनों ननद ने सुहागरात के लिए कमरे तैयार किये। और मुझे भी सजा कर कमरे में ले गई। मैं गुलाब की पंखुड़ियां पर अपने बेड पर बैठी रही अपने पिया की वाट जोह रही थी। वो करीब दस बजे आये। वो शराब के नशे में थे। जैसे ही अंदर आये उनकी भाभी कमरे का दरवाजा बंद कर दी वो बैठ गए। वो मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिए। और करीब आ गए मेरे माथे को चूमा।

मैं नजरे निचे किये बैठी थी उन्होंने मेरा घूँघट हटा दिए उन्होंने साडी का पिन खोल दिया और मैं बैठी थी ब्लाउज के ऊपर से चूचियां दिख रही थी वो वही देख रहे थे अचानक उनका हाथ मेरी ब्लाउज पर पड़ा और हलके साथ से वो मेरी चूचियों को सहलाने लगे। धीरे धीरे मैं लेट गई वो मुझसे चुम्मा मांगनें लगे। मैं हलके से एक किस उनके गाल पर दे दी। उन्होंने अपनी बैसाखी अलग रख दी क्यों की वो बैसाखी के सहारे से ही चलते हैं।

उन्होंने मेरी ब्लाउज को खोला और ब्रा का हुक खोला मेरी गदराई हुई बदन पर दो बड़ी बड़ी चूचियां बाहर निकल गई। वो देखकर हैरान हो गए वो मेरी तारीफ करने लगे तुम कितनी सुन्दर हो। वो मेरे होठ को चूमने लगे। वो मुझे बाहों में भरने लगे। मैं भी उनको अपनी बाहों में ले ली और चूमने लगी उन्होंने पेटीकोट का नाडा खोल दिया और मेरी पेंटी भी निकाल दी। वो कभी ऊपर कभी निचे कभी ऊपर कभी निचे। कभी चूचियां दबाते कभी मुँह में लेते कभी चूत सहलाते कभी चूत चाटते। करीब एक घंटे तक ऐसे ही करते रहे मैं तब तब बिना चुदे ही तीन बार झड़ चुकी थी।

मैं क्या क्या कहती अपने मुँह से की चोदो। मैं इशारा भी की अब शुरू करते है पर वो शुरू नहीं किये और लेट गए मेरे बगल में। मैं बोली क्या हुआ तो वो बोले बस हो गया। मैं बोली अभी तो कुछ हुआ भी नहीं और आप कह रहे हैं हो गया। तो वो कहने लगे। मैं इससे ज्यादा तुम्हे कुछ नहीं कर सकता। जैसे मेरे पैर सूखे हैं वैसे ही मेरा लंड भी सूखा था। मेरा लंड खड़ा नहीं होता है। माफ़ करना मुझे। पर मैं तुम्हे एक अच्छी ज़िंदगी दूंगा। और मैं तुम्हे ऐसी ज़िंदगी दूंगा जिसमे कोई रोक टोक नहीं होगा तुम अपने हिसाब से जीना यहाँ तक की तुम चाहो तो सेक्स सम्बन्ध भी किसी से बना सकती हो।

पर मैं तुम्हारी भावना को समझ सकता हूँ चाहे तो आज भी अपनी ज़िंदगी जी सकती हो। मेरे जीजा जी तुम्हारी मदद करेंगे। मैं उनसे पहले ही बात कर चुका हूँ। दोस्तों ये बात उनके मुँह से सुनकर थोड़ा हैरानी हुई पर परेशानी नहीं हुई मेरे पास और कोई चारा नहीं था इसके अलावा। पूरी ज़िंदगी सुहागरात के अपने देखती आई और आज ऐसे ही निकल जाये तो पूरी ज़िंदगी सोचते ही रहूंगी। की कुछ भी नहीं हुआ उस दिन।

जब इनके जीजा जी मुझे देखने आये थे शादी के पहले तो मैं फ़िदा थी उनपर क्यों की बात चित का तरीका इज्जत देना पढ़े लिखे सुलझे हुए इंसान और गोरा सुन्दर चेहरा। कोई भी पति के रूप में स्वीकार कर लेगी ऐसी है उनकी पर्सनालिटी। सच पूछिए तो मैं यही सोच रही थी खास मुझे ऐसा लड़का मिलता। पर मेरी पहुंच यहाँ तक नहीं थी तो सोच भी नहीं सकती थी। पर आज मुझे ऐसा लगा की मान लेती हु शादी उनसे ही हुई है। अब मैं खुश थी चलो पति सक्षम नहीं है पर जीजा जी इनके तो सक्षम है और जब मेरा पति ही बोल रहा था तो ऐसे में क्या सोचना।

दोस्तों जीजा जी बगल बाले कमरे में ही थे और उस कमरे का दरवाजा मेरे कमरे से भी था यानी को मेरे कमरे से बगल के कमरे में बिच के दरवाजे से जाया जा सकता है। तभी मेरे पति दे उनको व्हाट्सप्प पर मेसेज भेजा वो बिच के कमरे से अंदर आ गए। और पति देव उस कमरे में चले गए और दरवाजा उन्होंने बंद कर दिया। अब मैं और जीजाजी जिनको कुमार जी सबलोग कहते हैं। कुमार जी बेड पर बैठ गए और मैं भी वही पहले से ही बैठी थी कपडे अस्त व्यस्त थे क्यों की पहले उन्होंने खोल दिया था। पर किसी तरह पहन कर बैठी थी। वो आकर बोले अगर आप कहेंगे तभी आपसे रिश्ते बनाएंगे। और मैं तो कहता हूँ ज़िंदगी को जिओ और आप भी मजे करो। इतनी धन दौलत है पर एक चीज नहीं है वो मैं आपको दे दूंगा।

मैं बोली अब तो कोई चारा भी नहीं है। मेरे पास मैं वापस थोड़े ना जा सकती हूँ अपने घर। आप जैसा समझें ठीक वो करें। वो मेरे होठ को ऊँगली से छुए और बोले खुश रहिये और अपने पति को खुश रखिये। उनको आपका प्यार चाहिए शरीर नहीं। तभी मैं रो दी और उनके गले लग गई वो मुझे सहलाते रहे और मैं जैसे चुप हुई वो मेरे होठ पर किस कर लिए मैं अपनी आँखे बंद कर ली। वो चूमते रहे और मेरे कपडे खोलते रहे। मैं लेट गई उन्हों सारे कपडे उतार दिए।

उन्होंने अपने सारे कपडे उतार दिए और मुझे अपनी बाहों में ले लिए मेरी सिंदूर मेरी काजल फ़ैल चुका था। वो मेरे जिस्म से खेल रहे थे। मैं भी उनके उँगलियों की छुअन से काँप रही थी होठ दबा रही थी मेरी चुत गीली हो चुकी थी।मैं चुदना चाह रही थी क्यों की एक रात में दो बार गरम हो चुकी थी। पहले तो प्यासी ही रह गई थी पर इस बार मुझे जम कर लौड़ा चाहिए थे। मैं उनके लौड़े को पकड़ ली और अपने चूत में रगड़ दी। बोली वो पहले ही छेड़ कर चले गए हैं। अब आप मेरी आग बुझा दीजिये जो आग उन्होंने मेरे जिस्म में लगाई है।

वो मेरी चूचियों को दबा रहे थे पी रहे थे निप्पल को मसल रहे थे। और मेरी चुत में ऊँगली कर रहे थे मैं सिसक रही थी सिसकारियां निकल रही थी। पागल हो रही थी खुद ही अपनी चूचियां दबाती तो कभी चुत में ऊँगली करती। दोस्तों अब वो अपना लौड़ा मेरी चुत पर लगाए और मुझे कस के पकड़ा और जोर से घुसा दिए। इसी वक्त का इंतज़ार था मुझे वर्षों में लाल साडी में रहूं सिंदूर और काजल बिखरा हुआ हो मेरा पति मुझे जम कर चोदे। पर पति नहीं बल्कि और कोई चोद रहा था।

दोस्तों अब मैं निचे से धक्के देने लगी। मैं उनके छाती को सहलाने लगी। वो मेरे होठ को चूसने लगे। चूत में लंड डालने लगे। मैं अपनी पैरों से उनको बाँध ली वो बिच में मेरे पैरों से बंधे थे और जोर जोर से धक्के दे रहे थे। मेरी तो सिसकारियां निकल रही थी। चुदाई हो रहा था अंगडाइयाँ ले रही थी। मेरे जिस्म के सारे पुर्जे खुल गए थे वासना की आग भड़क गई थी। मुँह खुला का खुला ही रह रहा था कंठ सुख रहे थे होठ लाल हो गए थे। आँखे बंद हो रही थी पुरे शरीर में झांझझानाहट हो रही थी। मैं जोर से पकड़ कर गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी।

करीब एक घंटे तक हम दोनों भी सेक्स की नशे में थे और अचानक मेरे शरीर में आंधी आई और मैं उनको दबोच ली वो भी आ आ आ आ करने लगे और एक दम से दोनों शांत हो गए। मेरी चुत में वीर्य भर चुका था। दोनों शांत हो गए थे। अब हिला भी नहीं जा रहा था। हम दोनों ही अलग अलग हो कर सो गए थे आँखे बंद कर के। करीब आधे घंटे बाद दोनों उठे अपने अपने कपडे पहने वो फिर दूसरे कमरे में चले गए मैं अपने पति का इंतज़ार करने लगी।

दोस्तों ये मेरी सच्ची कहानी है। मैं दूसरी कहानी भी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिखने वाली हूँ आप जरूर पढियेगा।

सुहागरात रात में पति ने दोनों छेद को चोद डाला

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हाय फ्रेंड्स, आप लोगो का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में स्वागत है। मैं रोज ही इसकी सेक्सी स्टोरीज पढ़ती हूँ और आनन्द लेती हूँ। आप लोगो को भी यहाँ की सेक्सी और रसीली स्टोरीज पढने को बोलूंगी। मेरा नाम अवन्तिका है। आज फर्स्ट टाइम आप लोगो को अपनी कामुक स्टोरी सुना रही हूँ। कई दिन से मैं लिखने की सोच रही थी। अगर मेरे से कोई गलती हो तो माफ़ कर देना।
मै अभी अभी जवान हुई हूँ। मैं एक अमीर घराने से हूँ। मेरे पापा अमेरिका में डॉक्टर हैं। मै बहुत ही गोरी हूँ। लड़के मुझे देखते ही फ़िदा हो जाते है। मेरा बदन बहुत ही रसीला है। मेरे लिप्स तो एकदम गुलाब है। चूंचिया तो खरबूजे की तरह बड़ी बड़ी है। मेरी चूत भी बहुत लाजबाब है। इसका रस अभी तक बहुत कम ही लोगो को नसीब हुआ है। पूरा रस मैंने अपने होने वाले पति के लिए बचा कर रखा था। मेरी उम्र भी अब शादी की हो चुकी थी। मेरे सैयां जी के साथ सुहागरात का अवसर मुझे मिलने वाला था। मैं बहुत ही खुश थी। वो रात मुझे आज तक नहीं भूली जिस रात सैयां जी ने मेरा पहली बार काम लगाया था।
दोस्तों ये बात 2013 की है। जो की आज के 4 साल पहले की है। मेरे घर वाले मेरी शादी ढूंढ रहे थे। मै भी हर लड़की की तरह ख्वाब को सजा कर रखा था। अपने होंने वाले सैयां जी के साथ। फिर वो समय आया जब मेरी शादी तय हो गई। मेरा होने वाला पति किसी हीरो की तरह खूबसूरत था। उसकी पर्सनालिटी पर तो मै फोटो में ही देख कर फ़िदा हो चुकी थी। मैं तो उसे पाकर फूली नहीं समा रही थी। उसका घराना भी बहुत ऊँचा था। उसके पापा और मेरे पापा दोनों ही लोग अमेरिका में रहते थे।
वही उनकी दोस्ती हुई और रिश्तेदारी में बदल गईं। अब मेरी चूत का रिश्ता रितेश के लंड से हो गया था। हमारी शादी बड़ी धूम धाम से हुई। सुबह मै उनके घर विदा होकर आ गईं। सासू माँ ने और अन्य मेहमानों ने मेरा भव्य स्वागत किया। मै बहुत ही खुश थी। आज मैं चुदने वाली थी। मुझे आज जबरदस्त लंड मिलेगा। मै उसे खाने को बेकरार हो रही थी। फिर वो रात भी आ गयी। जिसका हर चूत को इंतजार होता है। जिस रात बीबी को लंड का दर्शन होता है। मै सज धज के अपने रूम में बैठी थी। मैं सुहागरात की सेज पर परियो सी सजी बैठी थी। अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार कर रही थी। रितेश आए और मेरे पास आकर मुझसे ज़माने भर की बात करने लगे। बातो ही बातो में वो रोमांटिक होने लगे। लेकिन मुझे तो इंतजार था कि वो कब अपना लण्ड मुझे दिखाएं। मगर मैं कैसे उनसे कहूँ की मुझे चुदने की बेचैनी हो रही है।
मैंने बहुत देर तक सोचा की क्या करूँ। अचानक मैंने एक आईडिया सोचा और धीरे-धीरे अपने गहने उतारने शुरू किए और अपनी साडी का पल्लू नीचे खिसका कर सीने से हटा दिया। ऐसा करते ही रितेश मेरी तरफ आकर्षित होने लगे। मेरे सफ़ेद बड़े-बड़े खरबूजे देख कर उनकी आँखे फटी की फटी रह गई। बिना पलक झपकाये मेरी चूंचियो को ताड़े जा रहे थे। उन्होंने मुझे बिना कुछ कहे उठा कर अपनी गोद में घसीटा और मेरी होंठो से अपने होंठ को चिपका कर मेरी सारी लिपस्टिक छुड़ा डाली। मेरे होंठो के लिप लाइनर को चूस लिया। अब मेरी देसी लुक उनसे भी देखी नहीं जा रही थी। मै अपना होश खो बैठी थी। मैं भी पागल सी हो गई और अपने हाथ उनके पूरे शरीर पर फिराने लगी। रितेश ने कब एक एक करके सारे कपड़े निकाल दिए मुझे तो पता भी नहीं चला कि उन्होंने कब का मुझे नंगी कर दिया था।
मैं तो उनके होंठों में ही गुम थी कि अचानक से एक ‘चटाक..’ से मेरे गांड में चोट सी महसूस हुई। मै चौंक गई। मैंने सकपका कर उनके होंठ छोड़ दिए और उनकी तरफ बुरी निगाहों से देखा.. तो वो मुस्कुरा रहे थे, बोले- ” क्या करूं अवन्तिका आदत से मजबूर हूँ। मुझे तुम्हारी गांड बहुत ही जबरदस्त लगी तो मार दिया। मुझे सेक्स करते समय कुछ भी होश नहीं रहता। मै क्या कर रहा हूँ। इस बात का मुझे पता ही नहीं चलता। मैंने भी मुस्कुरा दिया और कहा- कोई बात नही। मैं भी तुम्हारी तरह हूँ। मुझे भी कुछ होश नहीं रहता” मेरी गांड में कुछ लंबा मोटा सा महसूस हुआ। मैंने अपने ऊपर ध्यान दिया तो पता चला कि मैं उनके ऊपर नंगी बैठी हूँ। उनका लंड ही मेरी गांड में चुभ रहा था। मै उनकी गर्दन पर अपना हाथ टिका कर बैठी हुई थी।
मैं पूरी नंगी अपने पतिदेव रितेश की गोद में किसी बच्चे की तरह बैठी हुई थी। उन्होंने कुरता पायजामा अभी तक पहन रखा था। उनके कसरती बदन की मजबूती बाहर से ही महसूस हो रही थी। मगर उनका लण्ड देखने की चाहत अभी बरक़रार थी। हम दोनों खूब सेक्सी सेक्सी बाते करने लगे। वो मेरी चूंचियो के निप्पल को पकड़ पकड़ कर खीचते हुए मुझे गर्म कर रहे थे। मै“……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिकरिया भर रही थी। मेरी पेट खींचते ही सिकुड़ जाती। मेरा दिल धक धक कर रहा था। साँसे तेज होने लगी।
मैं उनकी गोद से उतरने ही वाली थी कि उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और बोले- “अवन्तिका !! तुम मुझे एकदम देसी गाय की तरह लगती हो। एकदम मासूम सी चाहे जहाँ हाथ लगाओ। कोई विरोध नहीं करती” मैंने भी कहा- “और तुम मुझे देसी साँड़ के जैसे लग रहे हो। पीछे पड़े हो। हर पल मेरे गुप्तांगों को ही छू कर मजा ले रहे हो” रितेश हंस दिए। उन्होंने मुझे कस के जकड लिया। मुझे चिपकाते हुए फिर एक बार होंठो को चूसने लगे। इतना जोश तो मैंने पहले कभी किसी में नही देखा था। जोशीले होकर होंठो को ही काटने लगे। मै तड़पती हुई “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की मदमस्त आवाज निकाल रही थी। धीरे धीरे उनके होंठ मेरी शरीर के नीचे के अंगों की तरफ बढ़ने लगे। वो मेरी चूचियों को पकड़ कर मींजने और सहलाने लगे। उन्होंने अपना मुह मेरी गोरी गोरी चूंचियो के काले काले निप्पल पर लगा दिया। रितेश बछड़े की तरह निप्पल को खींच खींच कर मेरा दूध पी रहे थे। कुछ देर तक पीने के बाद मुझे अपनी गोद से उतार कर बिस्तर पर ही खड़े होकर अपना कुरता उतारने लगे। फिर बनियान और पायजामा उतार कर बोले- “लो जी अब तुम्हारी बारी आ गई”
मैं उनके बड़े से मोटे लंड को देख कर डर गई। मेरा सर उनकी जाँघों के पास था। रितेश अपना लंड चूसने और सहला कर मुठ मारने को कह रहे थे।
मैं बोली- “आज नहीं। ये सब कल से किया जायेगा”
उन्होंने बिना कुछ कहे मेरा सर पकड़ कर अपने लण्ड पर अंडरवियर के ऊपर से ही रगड़ना चालू कर दिया। बहुत ही जोश में दिख रहे थे। मेरे दिमाग में अजीब अजीब हलचल होने लगी। मैं भी मदहोश सी होने लगी। मैंने उनका अंडरवियर पकड़ कर नीचे किया तो मेरे होश उड़ गए। बाप रे इतना मोटा काला लण्ड करीब 5 इंच का था। खड़ा होता तो कितना बड़ा हो जाता यही सोचकर मेरा दिमाग खराब हो रहा था। मेरे शौहर और मेरा दोनों का रंग एकदम गोरा है। मगर पता नहीं क्यूँ उनका लण्ड एकदम भुजंग काला था। मैं उनका लौड़ा देख कर हल्के से चिल्ला पड़ी- हे भगवान् ये क्या है? इतना बड़ा लंड तो किसी का जल्दी खड़ा होने पर भी नहीं होता। रितेश मन ही मन खुश हो रहे थे। वो हंसे मगर बोले कुछ नहीं और मेरा सर पकड़ कर अपने लंड को रगड़ने लगे। मैंने जोर लगाने की कोशिश की मगर वो ज्यादा ताकतवर थे। मेरे होंठ न चाहते हुए भी उनके काले लंड पर घुम रहे थे। कुछ ही देर मे मै विरोध करते करते थक गई थी। फिर मुझे पता नहीं क्यों वो काला साँप जैसा लंड बहुत ही मेरे मन को भाने लगा। कुछ देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा, मैंने भी जोर लगाना बंद कर दिया। तभी रितेश ने मेरे बालो की चोटी को जोर से खींचा तो मेरी मुह से आह निकलते ही मेरा मुँह खुल गया। जैसे ही मेरा मुँह खुला वैसे ही उन्होंने अपना लण्ड अन्दर करके मे चुसाना शुरू कर दिया। मुझे उनका लंड मुह में रख कर बहुत बुरा लग रहा था। मुझे लगने लगा की उलटी हो जायेगी। मेरा पूरा मुँह उनके लंड से भर गया।
तभी रितेश के लण्ड ने अपना रूप बदलना शुरू कर दिया। उसका साइज़ बढ़ने लगा। मेरी छोटी सी मुह में उनका बड़ा लंड बड़ा होकर मुझे तड़पाने लगा। मुझे लगा कि मेरा मुँह फट जाएगा। मैं छटपटा रही थी। हाथ-पांव पटकने लगी। मगर उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा। वो मेरी तरफ ध्यान ही नही दे रहे थे।अब मुझे साफ-साफ महसूस हुआ कि उनका लण्ड मेरे गले से होता हुआ सीने तक चला गया है। मेरी आँखों से आंसुओं नदी बह पड़ी। मैं उनकी जाँघों पर मर रही थी। नाखून गड़ा रही थी। मगर उन पर कोई असर न हुआ। वो बेदर्दी मुझे दर्द देकर मार ही डालेगा। मेरा सांस लेना दुष्वार हो गया। वो मेरा सर दबाये हुए थे। मै कुछ बोल भी नहीं सकती थी। मैंने हाथ जोड़ लिए और उनसे लण्ड निकालने के लिए बड़ी ही नम्रता वाली नजरों से देखा। मेरी आँखों के आगे अब तक अँधेरा छाने लगा था। वो अचानक मुझे छोड़ दिया। बैठ कर उन्होंने मेरी गांड पर जमकर एक तमाचा मारा। मै उछल पड़ी। वो बोले- “क्यों कैसा लगा”
मै रो रही थीं। कहने लगे- “अब मानोगी न मेरी बात”
मैंने अपना सर हिला दिया। मैं बिस्तर पर धड़ाम से गिर पड़ी। मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा था, मैं दमे के मरीज की तरह हांफ रही थी। इतने में पति बोले- “अब तू पूरी तरह से गाय लग रही है” वो मेरे दोनों हाथ फैला कर उनके ऊपर घुटने रख कर मेरे सीने पर बैठ गए। कहने लगे इसे अब चाट। जैसे तू गाय अपने बछड़े को चाटती है। चाट साली चाट…. अब मेरा दिमाग कुछ समझने के काबिल हुआ था। तो उनका सांडो वाला लंड देख कर मेरी आँखें चौंधिया गईं। कही मै सपना तो नहीं देख रही। मैंने अपने आँखों को मलते हुए उनका लंड देखा। करीब 10 इंच लंबा और 3 इंच मोटा काला लौकी जैसा लण्ड मेरे मुँह पर रखा हुआ था। मैं लण्ड देख के मेरी सिट्टी पिट्टी गुल थी। मेरे पति का लण्ड मेरे मुँह पर रखा हुआ था, मैं इतने बड़े लण्ड को देख कर हैरान थी। मेरे पति बोले- “चाट इसे जल्दी”
मैंने जल्दी से जीभ निकाल कर लण्ड चाटना शुरू कर दिया। वो बोले- “हाँ अब जाकर तू पूरी तरह से गाय बनी है” मैं रोती जा रही थी और लंड चाटती जा रही थी, मेरे दोनों हाथ उनके पैरों के नीचे दबे हुए थे। मेरे गोरे गालों पर उनका भारी लंड मुक्के की तरह पड़ रहा था। लगभग पांच मिनट बाद वो उठे और मुझे उठा कर गोद में बिठा लिया। अपने शेव किये चेहरे से मेरी चूंचियो पर मसाज करने लगे। कही कही की दाढ़ियां मेरी चूंचियो पर चुभ रही थी। उनका लण्ड ठीक मेरी चूत के नीचे था। उन्होंने मेरी दोनों टांगो को खोलकर जोर का झटका मारा। मै उछल पड़ी। जोर जोर से “आआआअ ह्हह् हह …..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” चिल्लाने लगी। उनके लंड का टोपा मेरी चूत में जाकर फंस गया।

वो और भी धक्का मार मार कर मेरी चूत में डाल डाल कर निकालने लगे। मै दर्द से तड़प रही थी। लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वो मेरी चूत की फडाई में लगे हुए थे। मुझे लग रहा था। किसी ने लोहे का मोटा रॉड गर्म करके मेरी चूत में डाल दिया हो। मै भी चूत की दर्द को भूल कर चुदाई करवा रही थी। अचानक उनका मोटा काला लंड मेरी चूत में हलचल मचाने लगा। वो मुझे किसी कुत्ते की तरह जल्दी जल्दी चोदने लगे। सैयां जी की ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली थी। वो ब्रेक मारने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उनकी स्पीड की रगड़ से मै बहुत परेशान हो गई थी। मैं दर्द से “उ उ उ उ उ……अ अ अ अ अ आ आ आ आ… सी सी सी सी….. ऊँ— ऊँ… ऊँ….” की आवाज के साथ अपनी चूत फड़वा रही थी। मेरी गाड़ पर मार मार कर मुझे भी जोश दिला रहे थे। मेरी चूत का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा। मै उसे महसूस करने लगी।
अब मुझे भी बहुत मजा आने लगा। मै भी अपनी चूत को उठा कर चुदवाने लगी। वो एंह…एंह करके मेरी चूत में अपना लंड हचक हचक कर पेल रहे थे। इतनी जोर की चुदाई ने तो मेरी जान ही निकाल दी। मुझे उसका लंड अब अच्छा लगने लगा। मैं उस लंड को खाकर मन ही मन खुश होने लगी। उसने अपने बल का प्रयोग करके मुझे अपने गोद में उठाकर चोदने लगा। मै भी उसका गला पकड कर उछल उछल कर चुदवा रही थी। वो मेरी गांड पर हाथ मार मार कर मुझे उछाल उछाल कर चोद रहे थे। कुछ देर बाद लंड की रगड़ मेरी चूत न सह सकी और अपना सफ़ेद मलाई निकाल दिया। मै झड़ गई। वो मेरी चूत को मलाई के साथ ही चोदने लगे। कुछ देर में उन्होंने मुझसे मेरी गांड चोदने को कहा। मै डर से हाँ करके बैठ गई। उन्होंने मुझे अपने खड़े लंड को गांड में डालकर उसपर ऊपर नीचे होने को कहा। मैं जैसा वो बोले करने लगी। उनका मोटा घोड़े जैसा काला लंड अपनी गांड में घुसाकर ऊपर नीचे होने लगी। जोर जोर से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज के साथ मैं अपनी गांड खुद ही चुदवा रही थी। मैंने भी स्पीड बढ़ाई लेकिन इस बार वो भी जबाब दे गए। उनका लंड माल निकालने वाला था।
सारा माल रितेश ने मेरी गांड में ही डाल दिया। मै थक गई थी। मै बिस्तर पर गिर पड़ी। वो हसते हुए मेरे ऊपर पैर रख कर चूंचियो को दबाने लगे। उस दिन की चुदाई ने तो सब यादगार बना दिया। मै आज भी उस लंड से खूब खेलती हूँ। मेरी चूत का अब तक भोषणा बन चुका है। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज के लिए नॉन वेजस्टोरी डॉट कॉम पढ़ते रहना। आप स्टोरी को शेयर भी करना।

ससुर ने मनाई मेरे साथ सेक्सी सुहागरात

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Sashur Bahu Sex : हेलो दोस्तों मैं आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालो से इसकी नियमित पाठिका रही हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती जब मैं इसकी सेक्सी स्टोरीज नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी कहानी सूना रही थी। आशा है की ये आपको बहुत पसंद आएगी।
मेरा नाम दीपा है। मेरी उम्र अभी 27 साल की है। मै बहुत ही गोरी छरहरे बदन की हूँ। मक्खन की तरह मेरा बदन बहुत ही सॉफ्ट है। मेरी आँखे देखने में बहुत ही नशीली लगती हैं। फेस से तो मैं एक दम आलिया भट्ट लगती हूँ। उसकी ही तरह मेरी बॉडी भी स्लिम फिट है। मै सेक्स मे कुछ ज्यादा ही रूचि रखती हूं। मुझे चुदवाने में बहुत मजा आता है। मेरे मम्मे बड़े बड़े आम की तरह है। मेरी चूत बहुत ही रसीली है। इसका रसपान मैंने कई लोगो को करवाया हूँ। मेरी नाभि देखने में बहुत ही आकर्षक लगती है। जब मैं साड़ी पहनती हूँ तो मेरे पेट पर ही सबकी नजर अटक जाती है। दोस्तों किस प्रकार ससुर जी ने अपना लौड़ा मेरे हवाले किया आपको अपनी इस कहानी में बताती हूँ।
जब मैं 24 साल की थी तभी मेरी शादी हो गई थी। उस समय मैं बहुत ही अच्छी कमसिन कली लग रही थी। शादी में सारे लोग मुझे ही घूर घूर कर देख रहे थे। शादी के बाद जब मै ससुराल आयी। तो ससुर जी की नजर हम पर ही रहती थी। हमेशा ही मुझे घूरते रहते थे। मेरी सास बहुत पहले ही चल बसी थी। इसलिए घर का सारा काम मुझे ही करना पड़ रहा था। हर चीज की देखभाल की जिम्मेदारी मुझ पर ही रहती थी। पहले तो मेरे पति देव जिनका नाम आकाश है वो यही घर ही पर साथ में रखते थे। पास में ही एक बैँक में अपने ऑफिस चले जाते थे। सारा दिन मुझे ही सताते थे। कही पीछे से आकर मेरी चूंचियो को पकड़ लेते। कभी मेरी गांड़ सहलाने लगते। जब तक वो ऑफिस नहीं चले जाते मुझे ऐसे ही सताए रहते थे। हर दिन वो मेरे साथ सुहागरात मनाते थे। मुझे भी बहुत मजा आता था। रोज रोज मुझे नये नये स्टाइल से मुझे चोदते थे। मुझे शादी से पहले चुदवाने का कभी मन ही नहीं करता था। लेकिन जब से सुहागरात में चूत का ताला खोला तब से बस हमेशा चुदवाने का मन करने लगा। चुदाई क्या होती है मैंने अपनी सुहागरात में जाना। हम ढेर सारी मस्ती करते थे। लेकिन ये मस्ती ज्यादा दिन टिक नहीं सकी। मेरे पति का ट्रांसफर कही अलग हो गया। जहां से रोज आना जाना मुश्किल था। ससुर जी कहने लगे तुम भी साथ चली जाओ।
लेकिन मुझे मेरे पति ने अपने साथ ले जाने से मना कर दिया क्योंकि वो चाहते थे की मैं घर पर रहूं। उनके पिता जी का ध्यान रखूँ। कोई घर पर था भी तो नहीं। मैं रुक गई। मुझे उनसे दूर रहना बहुत बुरा लग रहा था। लेकिन क्या करती मजबूरी थी। एक दो दिन में ही मेरी चूत में हलचल मचने लगी। मै चुदने को तड़पने लगी। आकाश तो अपने दूर चले गए थे। कौन शांत करे मेरे चूत की हलचल। हफ्ते बीत गए लेकिन चूत की प्यास बढ़ती ही जा रही थी। मैं रात दिन चुदाई के बारे में ही सोचती रहती थी। मैं एक दिन सुबह सुबह उठकर बहुत ही अच्छे चीज का दर्शन किया। मैंने जब ससुर जी का कमरा साफ़ करने के लिए उनके रुम में गई। तो जो देखा उसे देखकर मै दंग रह गई। ससुर जी अभी सो रहे थे। लेकिन उनका लंड जग चुका था। बाप रे इतना बड़ा भी लंड होता है। मैंने उस दिन देखा तो जाना।
ससुर जी का लगभग 12 इंच लंबा लंड बिस्तर पर खड़ा था। ससुर जी सो रहे थे। उनका लौड़ा खड़ा होकर मुझे गुड मॉर्निंग बोल रहा था। दिल तो कर रहा था। अभी के कभी इसे काट कर अपनी चूत में डाल कर खुजली मिटा लूं। लेकिन कैसे कर पाती ये सब इतना आसान तो था नहीं। मैंने पास जाकर उनके लंड को छुआ। लेकिन ससुर जी ने तुरंत करवट बदल ली। तो मैं वहाँ से चली आयी। ये बात ससुर जी को पता चल गई। मैंने उनके लंड को छुआ है। लेकिन मुझे नहीं पता था कि उन्हें ये बात पता चल गई है। वो मुझे बड़ी ही गन्दी नजरो से देख़ रहे थे। मै चलती तो मेरी गांड़ देखा करते थे। सामने आने पर मेरी चूंचियो को ताड़ते रहते थे। मै भी उनके लंड पर ही नजर लगा देती थी। इतना सब कुछ होने के बाद मैं सुबह होने का इंतजार कर रही थी। हर दिन की तरह उस दिन भी मैं उनके रूम में गई।
आज भी उनका लंड खड़ा था। मैंने जाकर उसे छुआ। अचानक ससुर जी ने आँखे खोल दी। उन्होंने मुझे देख लिया। मै शरमा के वहाँ से भाग आई। कुछ देर बाद ससुर जी उठ कर आये। मुझे देख देख़ कर मुस्कुरा रहे थे। मेरी तो गांड़ फटी जा रही थी। कुछ देर बाद फ्रेश होकर चाय पी के मेरे पास आकर कहने लगे।

ससुर जी- “बेटा इसमें शरमाने की क्या बात है। मैं तुम्हारी परेशानी को समझता हूँ”
मै चुपचाप बैठी हुई थी। उन्होंने आकर मुझे पकड़ कर कहने लगे। दीपा तुम आकाश के पास चली जाओ। वहाँ तुम्हे हर तरह का सुख मिलेगा।
मैं- ” नहीं बाबू जी मै आपको अकेले घर पर छोड़ कर कैसे जाऊं”
ससुर जी- “तुम मुझे सुख देने के लिए अपनी जवानी क्यों बेकार कर रही हो”
मै- “किस्मत में होगा तो जवानी का भी सुख मिल जायेगा”
मै बातों ही बातों में ससुर जो को फ़साने लगी। वो भी काफी दिनों के प्यासे लग रहे थे। मै शाम को खूब सेक्सी कपडे पहन कर निकली। उनका लंड खड़ा हो गया। उनकी धोती तो सर्कस का तंबू बन गई। खाना खाने के बाद उन्होंने मुझे अपने रूम में बुलाया। मै नेट वाला ब्लाउज पहन कर उनके सामने पहुची। उसमें मेरी ब्रा खूब साफ़ साफ़ दिख रही थी। मुझे देखकर वो आपे से बाहर होने लगे। पास पहुची तो मुझे अपने बिस्तर पर बिठाकर कहने लगे।
ससुर जी- “तुम मेरी इतनी सेवा करती हो। अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी भी जरूरतों को पूरा कर सकता हूँ”
मै- “हाँ कर दीजिये”
उन्होंने मुझे अपने से चिपका कर कहा। आज मैं तेरी ये वाली जरूरत पूरी करता हूँ। मैं मन ही मन खुश होने लगी। मुझे आज लौड़ा खाने का मौका मिलने वाला था। मै बिस्तर पर उनके साथ लेट गई। लेटते ही वो मेरे ऊपर चढ़ गए। उनका शरीर काफी भारी भरकम था। मेरी गर्मी दुगनी होती जा रही थी। मै हीटर की तरह गर्म होने लगी। उन्होंने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से दबोचकर मेरे होंठ पर अपना होंठ सटा दिया। दोनों कोमल पंखुडियो जैसे मेरे होंठ को चूस चूस कर लाल लाल कर दिया। मेरी सांस बढ़कर फूलने लगी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। होंठ चूमने में जब वो इतना टाइम लगा रहे थे। तो कितना टाइम चोदने में लगाएंगे। मै इसका अंदाजा लगा रही थी। उनकी मूछे मेरे गालो में चुभ रही थी। लग रहा था कोई पिन चुभो रहा है। मै भी उनका साथ दे रही थी। मुझे मजा आ रहा था। वो मुझे गालो से किस करते हुए मेरे बालों को सहला रहे थे। मै गर्मी की एक मशीन बनी जा रही थी। मैं पसीने से भीग गई। कुछ देर बाद उन्होंने अपने होंठो को मेरे होंठो से अलग करके मेरे पूरे बदन को चूमने लगे। मेरे अंदर बिजली दौड़ने लगी। बहुत देर तक उन्होंने मेरे साथ चुम्मा चाटी की। बुढापे में जब वो इतनी मजा दे रहे थे तो मेरी सास को कितना मजा दिया होगा। मैंने सोचा।
मैंने उन्हें अपने ऊपर से उतारा। वो मेरे चूंचियो के ऊपर सीने पर किस कर रहे थे। कुछ ही पलो में मेरी चूंचियो को अपने हाथो से दबाने लगे। मैंने उस दिन नेट वाली साडी और ब्लाउज पहन रखा था। जिसमे सबकुछ साफ़ साफ़ दिख रहा था। मैं भी ससुर जी के धोती पर अपना हाथ रख कर उनके लौड़े को बहुत ही अच्छे से सहला रही थी। उन्होंने मेरे ब्लाउज के हुक को एक एक करके खोल दिया। मै ब्रा में उनके सामने लेटी थी। वो मेरी चुच्चो को घूर घूर कर देख रहे थे। उन्होंने मुझे उल्टा लिटाकर ब्रा को भी खोलकर मेरे दोनो पंछियों को आजाद कर दिया। गोरे गोरे मेरे मम्मे बहुत ही जबरदस्त दिख रहे थे। ससुर जी दबा दबा कर कहने लगे। बहुत ही जबरदस्त चूँची है तुम्हारी। इतनी सॉफ्ट तो मैंने पहले कभी नहीं दबाई थी। आज लगभग 10 साल मुझे किसी की चूंची पीने का अवसर मिला है। इतना कहकर वो मेरी चूंचियो को और जोर से दबा कर पीने लगे।
मै उनको पकड़ कर दबा रहो थी। दांतो से निप्पल को काटते ही मैं “अई…अई…..इसस्स्स्स्स्स् स्स्….उहह्ह्ह्ह….ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिसकारी भर रही थी। पीते पीते मेरे पेट की तरफ बढ़ने लगे। एका एक मेरी ढोंढ़ी में अपनी जीभ डाल दी। मैं चौंक उठी। उन्होंने मेरी साडी उतारकर पेटीकोट में करके मुझे उठा दिया। पेटीकोट का नाड़ा खोलकर निकाल दिया। मुझे उनके सामने पैंटी में शर्म आ रही थी। वो कहने लगे- “मुझसे क्या शरमाना। मैं अब से तुम्हारा पति ही तो हूँ। जो ख़ुशी तुम्हारा पति देता है। आज से मै दूंगा”
इतना कहकर मेरी चूत पर अपना हाथ रख दिया। अपना लंड मेरी गांड में लगाने लगे। मैंने उनके लंड को कस के पकड़ लिया। उन्होंने कहा-“मेरी जान आज मैं तुम्हे अपने लंड के दर्शन कराता हूँ। अभी तक तुम परदे के पीछे देख़ रही थी”
इतना कहकर अपनी धोती निकाल कर फेंक दिया। वो नीचे कच्छा भी नहीं पहने थे। उनका मोटा काला नाग जैसा लंड बहुत ही डरावना लग रहा था।
मैंने उनके लंड पकड़कर अपने मुयः में रख लिया। उनका सुपारा मै लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। इतना मजा तो मुझे पहले कभी नही आया। मेरे पति का लंड छोटे बच्चे की तरह छोटा सा था। लेकिन मुझे उससे भी खेलने में मजा आता था। उन्होंने मुझे बिस्तर पर उठाकर पटक दिया। उसके बाद अपना कुर्ता निकाल कर मेरी पैंटी निकालने लगे। एक ही झटके में मेरी पैंटी को मेरी चूत से अलग कर दिया। मेरी दोनों टांगों को फैला कर उसका दर्शन किया। उसके बाद अपना मुह मेरी चूत पर लगाकर पीने लगे। मेरी चूत को पीते ही मेरी चीखें निकलने लगी। मै “…अहह ह्ह् ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ…आहा …हा हा हा”, की चीख निकालकर उनका माथा अपने चूत में चिपका दिया। वो भी समझ गए दीपा में कितना जोश है। मैंने अपनी चूत उठाकर चटाने लगी। वो मेरी चूत के दाने को काट काट कर उसका आनंद ले रहे थे। लेकिन मेरी तो जान निकल रही थी।
मैं अपनी चूत को मसल रही थी। अपने लंड को मुठियाते हुए मेरी चूत पर रगड़कर मुझे तड़पा रहे थे।
मैं- ” बाबू जी देर न करो डाल दो अंदर बहुत खुजली हो रही है”
ससुर जी- ” डालता हूँ अभी खुजली और बढ़ने दो”
इतना कहकर अपना लौड़ा जोर जोर से रगड़ने लगे। मेरी चूत से जैसे आग की लपटें निकलने लगी हो। आखिर कर अपना लंड चूत के द्वार पर लगा ही दिया। उन्होने जोर का झटका मारा। आधा लंड मेरी चूत ने घुस गया। पहली बार इतना मोटा लंड मेरी चूत में घुसा था। मैं तड़प उठी। जोर जोर से “आआआअह्हह्हह…..ईईईईई ईई……ओह्ह्ह्…..अई….अई…अई….अई–मम्मी…” की आवाज निकल गई। वो अपना लंड आधे चूत में ही अंदर बाहर करके चोद रहे थे।
कुछ ही देर बाद दर्द कम होते ही फिर से वही जोर का झटका दिया। मेरी चूत पूरी तरह से फट गई। मुझे लग रहा था मैं बेहोश हो जाऊंगी। दर्द से पसीने से भीग गई। लेकिन आज तो वो अपने मूड में थे। पता नहीं क्या चल रहा था उनके मन में। मेरी दर्द को समझ ही नहीं रहे थे। उसके बाद उन्होंने मुझे लगातार चोद रहे थे। मेरा दर्द कुछ ही देर बाद आराम होने लगा। मैंने भी अब चुदाई का मजा लेना शुरू कर दिया। मै भी अपनी कमर उठा उठा कर चुदवाने लगी। कमर उठाते ही वो लपा लप चोदने लगे। उन्होंने मेरी वक टांग उठा कर खुद भी लेट कर चोदने लकगी। सटा सट उनका लौड़ा अंदर बाहर हो रहा था। मैं भी “…उंह उंह उंह हूँ… हूँ…. हूँ…हमममम अहह्ह्ह्हह.. .अई…अई….अई…” की आवाज निकाल कर चुदवा रही थी। मुझे बहुत ही आनंद मिल रहा था। पहली बार इस तरह से मेरी चुदाई हो रही थी। मेरे पति तो 5 मिनट में ही झड़ जाते थे। ससुर जी ने मुझे खड़ी कर दिया।
मै चुपचाप खड़ी थी। पीछे से मुझे झुकाकर अपना लंड मेरी चूत में घुसाकर खूब जोर जोर से पेलने लगे। मेरी तो जान ही निकाल दी। मै भी काफी दिनों की चुदाई की प्यासी थी। एक एक पल का मजा ले रही थी। वो पेलते रहे मै अपनी चूंचियां मसलती रही। कुछ ही देर में वो थक गये। अपना लंड मेरी चूत से निकाल कर बाहर किया। उसके बाद वो लेट गए। मै अपनी चूत में उनका लंड घुसाकर उनके ही ऊपर लेट गई। पीछे अपनी गांड उठा कर अपनी चुदवाई करवा रही थी। वो भी अपनी कमर उठा कर मेरी चूत को फाड़ रहे थे। दोनो लोग पसीने से भीग गए। वो भी बहुत गर्म हो गए। अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मुझे कुतिया बना दिया। कुतिया स्टाइल में बैठी थी। वो अपने घुटनों को मोड़कर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया। बाप रे इतनी जोर से भी चुदाई होती है। मुझे उस दिन पता चल रहा था।
जब वो मेरी कमर पकड़ कर जोर जोर से अपना लंड जड़ तक घुसा कर अन्दर बाहर कर रहे थे। मुझे पता ही चल रहा था। मुझे आदमी चोद रहा है या रोबोट। मै कुछ ही देर में झड़ गई। अब मेरी चूत दर्द करने लगीं। चूत का भरता बनते ही उन्होंने अपना लौड़ा मेरी गांड़ में घुसाने लगे। मुझे क्या पता था आज मेरी गांड़ भी फटेगी। जैसे ही उन्होंने मुश्किल से अपने लौड़े का टोपा ही घुसाया होगा। मै जोर से “…..मम्मी….मम्मी….सी सी सी सी….हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ….ऊँ….ऊँ ..उनहूँ उनहूँ…” की आवाज निकाल कर चिल्लाने लगी। उन्होंने ने लगातार मेरी गांड़ चुदाई जारी रखी। कुछ देर बाद जब दर्द आराम हुआ तो मुझे भी मजा आने लगा। मैंने भी अपनी गाँड़ मटक्का करवा के चुदवाने लगीं। लेकिन ये सब ज्यादा देर चल नहीं पाया।
वो भीं कुछ ही पलों में झड़ने की कगार पर पहुच गए। उनकी छुड़ाओ करने की स्पीड बढ़ गयी। मै समझ गई। प्रसाद मिलने वाला है। कुछ देर तक चोदने के बाद उन्होंने अपना लौड़ा झट से मेरी गांड़ से निकाला। मेरी गांड़ से लौड़ा निकालते ही मैं बहुत ही उत्तेजित हो गई प्रसाद के लिए। उन्होंने अपना लंड मेरी मुह में ही रख कर स्खलित हो गए। उनका गाढ़ा माल मैं रसमलाई की तरह पी गई। उसके बाद उनके लंड को चाट कर साफ़ किया। दोनों लोग नहाने बॉथ रूम में गए। वहाँ पर भी मुझे लंड खड़ा होते ही एक बार चोदा। अब हम लोग रोज रात भर चुदाई करते हैं। कहानी आपको कैसे लगी, अपनी कमेंट्स नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दे।

सुहागरात में टूटी बीबी की सील

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हेल्लो दोस्तों मैं आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करता हूँ। मैं पिछले कई सालों से इसका नियमित पाठक रहा हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती जब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ता हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रहा हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी। ये मेरी जिन्दगी की सच्ची घटना है।

मेरा नाम पुष्कर है। मैं मध्य प्रदेश में रहता हूँ। मेरा कद 5 फ़ीट 10 इंच है। मेरा लौड़ा भी 8 इंच का है। जो की मेरी तरहही गोरा गोरा है। मेरा लौड़ा बहुत ही तेजी से खड़ा होकर लड़कियों की चुदाई करता है। मैने अब तक कई भाभियों के साथ सेक्स करके उन्हें उसका आनन्द दिया है। भाभियों को चोदने में कुछ ज्यादा ही आता है। मैने अब तक भभियो जैसी चुदाई अपने गर्लफ्रेंड के साथ भी नहीं किया है। भाभियो को उनके घर पर चोदने में कोई डर ही नहीं रहता। गर्ल फ्रेंड को घर पर चोदने में कोई आ न जाये यही डर लगा रहता हैं। और दोस्तों जहां डर हो जाता है वहाँ सेक्स ठीक से नहीं हो पाता है। दोस्तों मैं अब अपनी कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों मेरी शादी इसी साल हुई है। मेरी दुल्हनिया विदा होकर घर आई। मम्मी ने अपनी बहू का अच्छे ढंग से स्वागत किया। बारात 12 बजे तक वापस आ गई थी। पूरा दिन मैंने सोया था। रात भर का जगा था। मुझे घर पर आते ही नींद लग गयी। मै सो गया। शाम को मैं सो रहा था। तो सभी लोग आकर  मुझसे कहने लगे। सो लो बेटा आज रात फिर से जागनी पड़ेगा। सभी लोग ऐसा कहकर मजा ले रहे थे। इतना कह कर सब लोग हंस पड़े। मै तो सोच में पड़ गया आखिर बात क्या है भाई सब लोग कह कर हंस क्यों रहे है। मैंने भी कुछ नहीं बोला चुप चाप वही लेटा रहा।

रात को मैं उठा। बॉथरूम में जाकर नहाया। फ्रेश होकर मै सबके  साथ खाना खाने बैठा। सभी लोग मेरी तरफ देख देख कर हँस रहे थे। मै अकेला चुप चाप बैठा खाना खाकर उठ गया। मैंने अपने रूम में ना जाकर मम्मी के रूम में जाकर सोने लगा। मम्मी डांटने लगी। मै बाहर बरामदे में सोने लगा। मम्मी ने मुझे वहाँ से भगा मेरे रूम के बाहर दरवाजे के पास ले आई। मम्मी कहने लगी तुम्हारा अंदर कोई इन्तजार कर रहा है। और तुम यहाँ वहाँ सोते फिर रहे हो। मम्मी ने मुझे डांटकर अंदर कमरे में करके दरवाजा बन्द कर दिया। मै कुछ देर तक दरवाजा खट खटाया लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। मुझे ये शादी मंजूर नहीं थी। लेकिन घरवालों के प्रेसर से मुझे ये शादी करनी पड़ी। मै और क्या कर सकता था। मैंने भी हाँ बोल के शादी कर ली।

तो मैंने भी कुछ नहीं कहा। मैंने अभी तक लड़की भी नहीं देखी थी। जयमाल के समय मैंने एक पल के लिए देखा था। लेकिन मैंने उसे गौर से नहीं देखा था। मैंने सोचा मेकअप में तो हर कोई अच्छा लगता है। शायद ये भी उसी तरह की हो। मेरी बीबी का नाम रूचि था। बिस्तर पर बैठी मेरा इंतज़ार कर रही थी। बिल्कुल फिल्मो की तरह। मैंने उसे न देखते हुए उसके बगल में जाकर लेट गया। मैंने अपना मुह घुमा लिया। रात के करीब 11 बजे थे। कुछ देर बाद रूचि मुझसे पूंछने लगी।

रुचि- “क्या बात है। आप मुझसे बोल क्यों नहीं रहे”
मैं- “चुप चाप लेट जाओ। मुझे कोई बात नहीं करनी”

रूचि- “मै अगर तुमको नहीं पसंद थी। तो शादी ही क्यों की मुझसे। तुम्हे ना बोल देना चाहिए था”
मै- “मुझे बोलने ही किसने दिया। किसी ने मेरी मर्जी भी नहीं पूँछी। मै क्या चाहता हूँ। बस यही बात बोल रहे थे सब। लड़की बहुत अच्छी है”
रुचि- “हाँ वो तो मै हूँ ही”

इतना कह कर रूचि भी मेरे बगल में लेट गयी। मै चुपचाप लेटा रहा। रूचि कुछ देर बाद सो गई। मैंने अपना मुँह उसकी तरफ किया। रुचि तो वास्तव में बहुत ही सुंदर लग रही थी। मैंने जैसा सोचा था वैसा कुछ भी नहीं था। रुचि का फेसकटिंग बहुत ही जबरदस्त थी। रूचि की नाक और उस पर पहनी नथ बहुत ही जबरदस्त लग रही थी। मैने उसको बहुत ही गौर से देखा। रूचि की चूंचियां ब्लाउज में उभरी उभरी लग रही थी। वो प्यारी और सुंदर दिख रही थी। मुझे रुचि को देख कर प्यार आने लगा। रूचि की चूंचियो को मैंने छूने के लिए अपना हाथ बढ़ाया। मैंने धीऱे से उसकी चूंची को दबाया। रूचि की चूंचिया बहुत ही सॉफ्ट थी। वो शादी के जोड़े में बहुत ही अच्छी लग रही थी। मै रूचि से चिपक कर करीब जाकर उसे देखने लगा। उसकी आँख कुछ देर बाद खुली तो मुझे खुद को देखते हुए बहुत ही खुश हो रही थी। मैं कुछ न बोल कर सिर्फ उसे देखता रहा। उसने मुझे देखता देख कर कहा- “क्या बात है अब बड़ा प्यार आ रहा है”

मै- “हाँ आ तो रहा है”

मैंने भी बात बनाई। मैंने कहा- “अब तो जिंदगी साथ गुजारनी है तुम्हारे साथ तो प्यार तो करना ही पडेगा। मैं इतना कह कर चुप चाप हो गया। रूचि भी मुझे देखने लगी। देखते ही देखते सुहागरात का माहौल बनने लगा। हम एक दूसरे की तरफ देखने लगे। मैं थोड़ा सा रूचि की तरफ खिसक कर चला गया। पूरा कमरा खूब अच्छे से सजाया गया था। बिस्तर पर गुलाब के फूल बिखरे पड़े थे। मुझे ये सब देख कर बहुत अच्छा लग रगा था। मुझे तो उसी पल प्यार हो गया जैसे ही मैंने उसे देखा था। मैंने रूचि को अपने सामने कर लिया और देखता रहा।

मैंने अपनी बीबी को बाहों में भर लिया। इससे पहले वो कुछ बोलती मैंने उसे सॉरी बोल दिया। रूचि का खुला मुह तुरंत बंद हो गया।
रुचि- “सच में आप मुझे प्यार करने लगे हो”

मै- “लेकिन मुझे नहीं पता था। मेरे घरवालों  मेरे लिए तेरी जैसी लड़की से मेरी शादी कर देंगे। मैंने तुम्हे पहले देखा होता तो शायद इतना कुछ हुआ ही ना होता” इतना कह कर मैंने उसे कस कर दबा लिया। उसने भी मुझे देख कर चिपक कर दबा लिया। उसका चिपकना बता रहा था उसने मुझे माफ़ कर दिया। मैंने अब तक उसे ना देखा  होता तो शायद उसकी पहली रात यानि सुहागरात का कोई आनंद न ले पाता। उसका चेहरा अपने सामने करके उसके होंठो को देखने लगा। क्या मस्त लग रही थी। मुझसे कंट्रोल नहीं हो पा रहा था। मै किस करने को बेचैन होने लगा। उसने अपनी आँखे बंद कर ली। उसकी आँखों का काजल बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसके होंठ पर लगी लिप्स्टिक बहुत ही जबरदस्त लग रही थी।

मैंने उसके होंठो को देखा। लिप्स्टिक के साथ साथ रूचि के होंठो पर लगा लिप लाइनर बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने बिना कुछ सोचे समझे ही उसके होंठ पर अपना होंठ रख दिया। चूमने में बहुत ही अच्छा लग रहा था। चूमते ही उसके होंठ की कुछ लिप्स्टिक मेरे होंठ पर भी लग गई। मैं चूसने लगा। रूचि मेरा गला पकड़ कर अपने होंठो को चुसा रही थी। मैने  चूस चूस कर सारी लिपस्टिक छुडा दी। मैंने उसे अच्छे से किस करना सीखा दिया। किस करने से लग रहा था कि रूचि अभी तक इन सबसे अनजान थी। वो अपनी आँखे बंद करके मुझे किस कर रही थी। बहुत ही चुदासी होने लगी। रूचि की गर्म गर्म साँसे बहुत ही जोश दिला रही थीं। उसकी साँसों को महसूस करके मैंने रुचि की तरफ देखा। उसने शर्म के मारे अपनी आँखे झुका ली। मैंने उसकी आँखों में शर्म देखकर बहुत ही अच्छा लग रहा था। वो मुझे देखकर हँसने लगी.

मैंने रूचि से पूंछा क्यों हँस रही हो। वह मेरे होंठ पर लगी लिप्स्टिक को देखकर हँस रही थी। उसको हंसता देख कर लगरहा था कोई परी आ गई हो नीचे। उसकी हंसी बहुत ही किलर लग रही थी। उसकी चूंचियो की तरफ देखकर अपने हाथों से पकड़ लिया। वह अब भी शरमा रही थी। मैंने हाथों में लेकर खेलने लगा। उसके बूब्स बहुत ही मुलायम लग रहे थे।  उसकी चूंची को मैंने देखने के लिए ब्लाउज को निकाल दिया। उसकी ब्लाउज का हुक खोलते ही उसकी ब्रा दिखने लगीं। लाल रंग की ब्लाउज के नीचे लाल रंग का ब्रा बहुत ही रोमांचक लग रहा था। उसकी ब्लाउज को निकाल कर बिस्तर पर रख दिया। रूचि तो बहुत ही हॉट लगने लगी। उसके हॉट सेक्सी रूप को देख कर मेरा लौड़ा बेकाबू होता जा रहा था। उसकी चूंचियो को ब्रा ने कस कर दबा रखा था। उसकी चूंचियो को मैंने ब्रा से आजाद करने के लिए  अपना हाथ बढ़ाया। उसकी चूंचियो के ऊपर ब्रा की पट्टियां गोरे बदन पर बहुत ही अच्छी लग रही थी। मैंने उसकी ब्रा की पट्टियो पर हाथ चलाकर पीछे से रूचि की ब्रा का हुक खोलकर उसकी ब्रा को निकाल दिया। उसकी ब्रा को निकालते ही उसकी गोरी गोरी चूंचियां दिखने लगी। दोनों चूंचियां जैसे किसी गाडी के हेडलाइट लग रहे थे। गोरी चूंचियों पर काले कलर का निप्पल बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी हेडलाइट को दबा दिया।

मैंने रूचि के निप्पल को अपने मुह में भर लिया। वह सुसुक सुसुक कर “आई….आई.. .आई….अहह्ह्ह्हह. ..सी सी सी सी…हा हा हा…” करने लगी। मै जब भी उसकी चूंचियो को पीता था वह सिसकने लगती। बहुत मजा आ रहा था। रूचि पिलाने में आनंद ले रही थी। काफी देर तक पीने के बाद मैंने उसकी साडी निकालने के लिए उसको खड़ा  कर दिया। वह खड़ी हो गई। मैंने उसकी साडी को निकाल दिया। उसको सिर्फ पेटीकोट में कर दिया। उसे पेटीकोट में देखना अच्छा नहीं लग रहा था। मैंने रूचि की पेटीकोट को भी निकाल दिया। वो अब अपने सारे गहने को निकालने लगी। तब तक मैं उसकी गांड़ को पैंटी के ऊपर से ही सहला रहा था। उसने बिस्तर के बगल टेबल पर अपने गहने रख दिये। मैंउसे चोदने को बेकरार होने लगा। उसकी हेडलाइट दबाने जे बाद मेरे अंदर करंट दौड़ने लगा।

मैंने भी अपना पैंट निकाला। मेरे पैंट को निकलते ही मेरा लौड़ा कच्छा फाड कर बाहर आने को तैयार था। वो मेरे लौड़े का क्रिया कलाप देख कर डर रही थी। उसको मैंने लौंडा दिखाने के लिए अपना कच्छा निकाला।  निकलते ही मेरा लौड़ा खड़ा होकर उसके सामने प्रस्तुत हो गया। उसने लौड़ा बहुत ही गौर से देखना शुरू किया। मैंने हाथों में पकड़ा दिया। उसने डरते हुये पकड़ लिया। मैंने उसका डर छुड़ाते हुए अपना हाथ उसकी हाथ पर रख कर अपना लौड़ा आगे पीछे करवाने लगा। उसका डर ख़त्म हुआ।

उसने मुठ मार मार कर मेरा लौड़ा बड़ा कर मोटा कर दिया। मैंने रुचि को लौड़ा चूसने को कहा। उसने चूसने से मना कर दिया। मैंने उसको बिस्तर पर लिटाकर उसकी पैंटी को निकाला। मैंने उसे अपने नाक में लगा कर सूंघा। उसकी पैंटी से बड़ी मादक खुशबू आ रही थी। उसकी चूत को देखने को मैं बेकरार था। उसकी दोनों टांगों को फैला दिया। टांगोंके बीच में छुपी चूत दिखने लगी। उसकी चूत पर बहुत गजब की चमक थी। देखते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो गया। उसने एक दो दिन में ही अपनी चूत के बालों को हटाया था। मुझे साफ़ चिकनी चूत को देख कर मुह में पानी आ जाता है। मैंने तुरंत ही उसकी चूत में अपना मुह लगा कर  चाटने लगा। मुझे चाटने में बहुत ही मजा आ रहा था। मैने उसकी चूत के दोनों टुकड़ो के बीच की दरार में अपनी जीभ नीचे से ऊपर करके चाटने लगा। मेरे ऐसा करने पर रूचि की चूत ने अपना गर्म गर्म ताजा माल निकाल दी। मैंने उसके चूत के रस का रसपान किया। बहुत ही मीठा स्वाद लग रहा था। मैंने साऱा माल चाट लिया। मै उसकी चूत के दाने को पकड़ कर खींच कर अपने दांतों से काट कर चूस रहा था।

रूचि मेरा सर पकड़ कर दबा देती और“ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्हआआआअह्हह्हह… अई…अई….अ… उ उ उ उ उ..” की आवाज निकाल रही थी। वह चुदवाने को तड़प रही थी। उसकी तड़प मुझसे देखी नहीं गई। मैंने अपना लौड़ा उसके चूत के छेद पर रख कर रगड़ने लगा। उसकी चूत गर्म होकर लाल हो गई। उसकी छेद में अपना लौड़ा डालने को मैं भी बेकरार होने लगा। रूचि की चूत में अपना लौड़ा घुसाने की कोशिश करने लगा। मेऱा लंड उसकी चूत में घुस ही नहीं रहा था। मैंने बहुत धक्का मारा लेकिन हर बार मेरा लंड बाहर आ जाता था। मैंने गुस्से में आकर खूब तेज धक्का मारा। मेरे लौडा टोपा सहित थोड़ा सा  अंदर घुस गया। रूचि जोर से“….मम्मी…मम्मी…सी सी सी सी…हा हाहा ….ऊऊऊ …ऊँ…ऊँ. .ऊँ…उनहूँ उनहूँ…”की चीख निकालने लगी। मैंने सोचा यही दर्द पर और दर्द दे दूं नहीं तो बाद में और चिल्लयेगी। मैंने अपना लौड़ा धक्का मार कर पूरा अंदर कर दिया।

उसके दर्द के कारण मैं धीऱे धीऱे चुदाई करने लगा। उसने चिल्ला चिल्ला कर पूरा कमरा भर दिया। हर तरफ बस उसी की आवाज गूँज रही थी। कुछ देर बाद उसे उसकी चूत के  दर्द से छुटकारा मिल रहा था। मैंने लौड़े पर कुछ गीला गीला लगा महसूस किया।  मैंने  उसकी चूत से लौड़ा निकाला। पूरा लाल लाल हो गया था। उसकी सील टूटने से निकला खून मेरे लौड़े को रंग दिया। सारा खून बिस्तर पर लगता उससे पहले मैंने पास में रखे पेपर को रूचि की चूत के नीचे लगा दिया। उसको मैंने बिस्तर से नीचे उतार कर टेबल के सहारे खड़ा किया। रूचि टेबल पकडे खड़ी थी। मैं उसके पीछे खड़ा हो गया, उसकी चूत में अपना लौड़ा डाल कर जोर जोर से चुदाई करने लगा। वह भी“ हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ …ऊँ… ऊँ… ऊँ  सी सी सी सी… हा हा हा… ओ हो हो…” की आवाज के साथ चुदवा रही थी।

मैंने उसको टेबल पर लिटा कर उसकी कमर को पकड़ कर जबरदस्त  चुदाई करने लगा। उसकी तेज चुदाई से मेरा लौड़ा जल्दी ही स्खलित होने वाला हो गया। मैंने अपना लौड़ा रूचि की चूत से बाहर निकाल कर उसकी चूत पर ही झड़ दिया। हमने एक दूसरे को साफ किया। दोनो लोग खूब थक गए थे। हम लोग नंगे ही लेटे रहे। मैंने कुछ देर बाद उठ कर एक बार फिर से चुदाई की। उसके बाद मैंने उसकी गांड़ मारी। हम दोनों रात भर खूब चुदाई करते हैं। कहानी आपको कैसे लगी, अपनी कमेंट्स नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दे।

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